मर जाऊंगा मैं चूड़ी की खन खन से मेरे दोस्त
इक बार मुझे मिलने दो दुल्हन से मेरे दोस्त
तुम उसकी हथेली से मिटा लोगे मेरा नाम
क्या नाम मिटा पाओगे धड़कन से मेरे दोस्त
छप्पर के मनाज़िर पे न इल्ज़ाम लगाओ
जब सांप निकल आते हैं चंदन से मेरे दोस्त
शायर से लगा रक्खी है इक बाप ने उम्मीद
क्या सूट सिए जाते हैं क़तरन से मेरे दोस्त
हां, तुमको भी रस्ते खुलें हैं जाओ मेरी जान
मैं खोता ही तो आया हूं बचपन से मेरे दोस्त
इक दिन मैं उतर जाऊंगा लोगों के दिलों में
इक दिन वो पलट आएगी लंदन से मेरे दोस्त